posted by Pawan Kumar Jury
जेल अधिकारी ने बीबीसी की पत्रकार को इस आधार पर अनुमति दी थी कि वो मुजरिम के साक्षात्कार को रिकोर्ड कर के जेल से बाहर नहीं ले जायेंगे, किन्तु वो इसे तस्करी करके न सिर्फ बाहर ले गए बल्कि इसका प्रसारण भी किया । . पत्रकार और बीबीसी ने भारत सरकार के गाल पर तमाचा मारा है, जेल नियम तोड़ने के लिए पत्रकार पर केस चलाया जाना चाहिए और प्रसारण के लिए बीबीसी को भारत में बेन किया जाना चाहिए । . मैंने स्वयं न तो यह वृतचित्र देखा है, और न ही मैं ऐसी कलुषित सामग्री को देख कर अपना समय बर्बाद करना चाहूँगा जिसे सिर्फ भारत की सांस्कृतिक छवी धूमिल करने के लिए रचा गया हो । जैसा कि आम तौर पर ऐसी विवादित सामग्रियों की दर्शक संख्या बढाने के लिए जिस मासूम पैंतरे का इस्तेमाल किया जाता है, कई बीबीसी प्रेमी यह सवाल पूछते डोल रहे है कि : क्या आपने यह साक्षात्कार देखा है ? आप इसे बिना देखे इस पर कोई टिपण्णी कैसे कर कर सकते ? यह तो सरासर बेईमानी है, पहले आप इसे देखिये, फिर अपनी राय दीजिये । एक 20 फुट गहरे गड्डे के बारे में कल्पना कीजिये, जो कि कुत्तो के मल-मूत्र से भरा है, तथा आपसे कहा जाता है कि, अरे !! आप इसे गन्दा और दुर्गन्धयुक्त कैसे कह सकते हो, जब तक कि आप इसमें डूबकी लगा कर न देख लो । पहले इसमें स्नान कीजिये फिर अपनी राय दीजिये । बहरहाल कई विष्ठा प्रेमी इस में डूबकिया लगा कर इस पर तब्सरा कर रहे है, तथा औरो को भी आमंत्रित कर रहे है, ताकि वे इस परनाले पर अपनी राय रख सके । . जब मुझे इस घटना की जानकारी हुयी तब मैं उस जेल अधिकारी को सलाखों के पीछे भेजने के लिए प्रचार अभियान चलाने के लिए उद्धत था, जिसने इस साक्षात्कार को जेल से बाहर ले जाने की अनुमति दी । क्योंकि मुझे यह मालूम है कि जेल नियमो के तहत किसी भी सजायाफ्ता मुजरिम के साक्षात्कार को सार्वजनिक नही किया जा सकता, जब तक कि जेल अधिकारी या न्यायलय इसकी अनुमति न दे दे । . पर अब यह साफ़ हो चुका है कि, पत्रकार ने जेल अधिकारी के साथ छल किया तथा बिना जेल अधिकारी को सूचित किये तथा बिना लिखित अनुमति के इस साक्षात्कार को जेल से बाहर ले आई । मुझे नही लगता कि जेल अधिकारी दोषी है, क्योंकि पत्रकार को यह जानकारी दे दी गयी थी साक्षात्कार को बिना अनुमति के जेल से बाहर ले जाना नियम विरुद्ध है । पत्रकार ने सामाजिक विषय पर वृतचित्र बनाने के लिए मुजरिम से बातचीत की अनुमति मांगी तथा साक्षात्कार रेकोर्ड कर के तस्करी के माध्यम से जेल से बाहर ले आई । . बीबीसी इस अवैध सामग्री के प्रसारण को रोक सकती थी, किन्तु चेनल ने इसे प्रसारित कर दिया । इस लिहाज यह आसानी से समझा जा सकता है कि, बीबीसी ने पत्रकार को वे संसाधन जुटाए जिसकी मदद से पत्रकार जेल नियम तोड़ने का दुस्साहस कर पायी । . समाधान : भारत के गृह मंत्रालय को इस मुकदमे की सुनवाई करने के लिए 1500 नागरिको की ज्यूरी बुलानी चाहिए, जिनकी आयु 35 से 55 वर्ष के बीच हो । ज्युरर्स का चयन देश की मतदाता सूची में से क्रमरहित विधि से किया जाए, तथा यह ज्यूरी मंडल फैसला करे कि, क्या बीबीसी को भारत में बेन किया जाना चाहिए या नही । . यदि मुझे ज्यूरी सदस्य बनने का मौका मिलता है, तो ज़्यादातर संभावना है कि, मैं बीबीसी को 5 वर्ष के लिए भारत में प्रसारण करने पर रोक लगाने की अनुशंषा करूँगा, तथा चाहूँगा कि पत्रकार को 1 वर्ष के कारावास की सजा दी जाए । अन्य नागरिक क्या रुख रखते है, यह उनका अपना फैसला है । ( पत्रकार को महिला होने तथा उम्र के आधार पर 6 माह की अवधि की छूट दी जा सकती है ) . यह खुली हुयी बात है कि बीबीसी यह साबित करता आया है कि बीबीसी प्रेमियों के अलावा सभी भारतीय गंभीर सामाजिक मानसिक व्याधि से पीड़ित है, और यह वृतचित्र भी उसी प्रयास की एक कड़ी है । PK, OMG, AIB से यदि आपका पेट न भरा हो तो NDTV, TIMES NOW, इन्डियन एक्सप्रेस आदि को देखते पढ़ते रहिये ताकि इनकी दर्शक संख्या तथा टी आर पी बढती रहे, और ये MNCs/मिशनरीज़ द्वारा संचालित मिडिया समूह भारतीय संस्कृति पर कीचड़ उछालने की सामग्रियों का प्रसारण करते रहे । यदि आप बीबीसी से बोर हो रहे है तो चेनल बदल कर एनडीटीवी या टाइम्स नाउ पर जाइये तथा उन चुनिन्दा कार्यक्रमो को देखिये जो यह दर्शाते है कि 'भिखारियों और मदारियों' का यह देश आज भी किस प्रकार की मानसिक विकृतियों का शिकार है । क्योंकि ये चेनल 1000 चीजो में से ढूंढ कर यही एक चीज उन भारतीय तथाकथित बुद्धिजीवियों को दिखाना चाहते है, जिन्हें इस तरह की अपसंस्कृति का भौंडा चित्रण देखना पसंद है । . अपने क्षेत्र के सांसद को SMS द्वारा आदेश भेजे कि बीबीसी के प्रसारण को भारत में बेन किया जाए । मेसेज में ' #banbbcafterjurytrial ' अंकित करें । _________________
by Pawan Kumar Jury
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