by Pawan Kumar at December 02, 2014 at 12:04AM
आज सायंकाल 5 बजे छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सली हमले में 14 जवान शहीद हुए है । . खनन कम्पनियाँ आदिवासी इलाको के खनिज संसाधनों को हडपने के लिए नेता एवं प्रशासन से गठजोड़ कर लेती है । अपनी जमीन बचाने के लिए जब ये नागरिक सरकार के खिलाफ हथियार उठा लेते है, तो नक्सल वादी कहाते है । . भारत की जमीन पर घात लगाए बैठे चीन द्वारा इन असंतुष्ट नागरिको को हथियार और धन मुहैया कराया जाता है, जिससे सशस्त्र संघर्ष का मैदान तैयार हो जाता है । . पेड मिडिया और राजनेतिक दल इन्हें माओवादी विचारधारा से जोड़ कर अपने आप को डिफेंड करते है, जो कि सफ़ेद झूठ है । माओवाद का इनसे कोई लेना देना नही, ये भारत के नागरिक है, जो धरना, अनशन, प्रदर्शन और खोखले लोकतंत्र से आजिज़ आये हुए है, अत: अपनी जमीनों की रक्षा के लिए इन्होने हथियार उठा रखे है । . मुझे बंगाल के नक्सल वादी इलाको में रहने का अवसर मिला, तब मैंने महसूस किया कि, यदि इन्हें पूर्ण लोकतांत्रिक अधिकार दिए जाए तो, नक्सलवाद का हल बेहद शांतिपूर्ण तरीके से किया जा सकता है, किन्तु सरकारे इन्हें हक देने को तैयार नही और कम्पनियां इनकी जमीनों में छुपे कीमती खनिज को छोड़ने को तैयार नही है । . 7 राज्यों के 200 जिले नक्सल वाद से पूरी तरह प्रभावित है, और समस्या आगे चलकर और भी विकराल रूप ले सकती है । अब विदेशी कम्पनियां खनन क्षेत्र को हड़प रही है, मोदी सरकार धडाधड FDI को अनुमति दे रहे है, अत: बेहतर है, कि हम इस समस्या के शांतिपूर्ण हल के लिए आवश्यक कानूनों को गेजेट में छापने की मांग करे । . बीजेपी-कोंग्रेस-आप, मोदी-सोनिया-केजरीवाल आदि सभी नक्सली समस्या को सिर्फ बढ़ा रहे है, और आगे भी बढ़ाएंगे, क्योंकि ये सभी नेता अपनी छवी बनाए रखने के लिए पेड मिडिया पर निर्भर है, और मिडिया MNCs और मिशनरीज़ द्वारा संचालित है । इनमे से किसी भी नेता/पार्टी ने अब तक इस समस्या के हल के लिए कभी कोई क़ानून न तो बनाया है, न ही प्रस्तावित किया है, अत: इन पार्टियों से उम्मीद करना इसलिए भी बेमानी है, क्योंकि इन सभी पार्टियों के नेता भी उस औने पौने दाम में लूटी जा रही सम्पदा में हिस्सेदार है । . प्रजा अधीन राजा, पूरी तरह अहिंसावादी संघठन है, और नक्सलवादियों के सशस्त्र संघर्ष की भर्त्सना करता है । . आदिवासी इलाको में सामान्य जीवन व्यतीत करना भी बड़ा दुष्कर होता है। इन पिछड़े हुए इलाको में जनसँख्या घनत्व कम है, स्कूल, अस्पतालों का दूर दूर तक कोई ठिकाना नही है, रोजगार का कोई विकल्प नही है, संचार साधन, सड़के आदि नही है, ऐसी स्थिति में दमन और शोषण नागरिको में तीव्र असंतोष पैदा कर देता है । . प्रशासन इनकी जमीने हड़प कर कम्पनियों को देता है, विकास के नाम पर आया पैसा नेता लोग खा जाते है, ऐसे में मिशनरीज़ का काम आसान हो जाता है, मिशनरीज़ वहां इनके लिए स्कूल और अस्पताल खोल कर इनकी सेवा करती है, जिस से उन्हें पादरी और चर्च से सहानूभूति हो जाती है, और बड़े पैमाने धर्मांतरण होते है । . छत्तिसगढ़ में 10 वर्षो से बीजेपी सरकार है, किन्तु बीजेपी ने इस समस्या के लिए कोई क़ानून पास नही किया है। केंद्र में मोदी साहब को 6 माह हो चुके है, लेकिन उन्होंने इस विषय पर कोई कानूनी कदम नही उठाये है । . सीमावर्ती इलाको में नक्सल समस्या गंभीर होती जा रही है, क्योंकि चीन इन इलाको में हथियारों की पूरी मदद भेज रहा है । बांग्लादेशी घुसपेठियो के तार नक्सल समूहों से जुड़े हुए है, और वही इनकी सप्लाई चेन का कार्य करते है । . स्थिति तब बदतर हो जायेगी जब पूर्वोत्तर से चीन या ISIS भारत पर हमला करेगा । ऐसी स्थिति में चीन बांग्लादेशी घुसपेठियो के माध्यम से नक्सल वादियों को भारी मात्रा में हथियार भेज सकता है । ऐसी स्थिति में जबकि भारतीय नागरिक हथियार विहीन है, हम आंतरिक और बाहरी दोनों मोर्चो पर बुरी तरह से मार खा सकते है । . समाधान : 1. राईट टू रिकाल पुलिस प्रमुख : ऐसे इलाको में पुलिस निरंकुश होने से बड़े पैमाने पर शोसण करती है, जिससे बचने का इन नागरिको के पास कोई कानूनी उपचार नही होता । राईट टू रिकाल पुलिस प्रमुख का क़ानून पास होने से क्षेत्र के नागरिक भ्रष्ट आचरण करने पर पुलिस प्रमुख को मतदान द्वारा नौकरी से निकाल सकेंगे, जिस से पुलिस विभाग क्षेत्र के आदिवासियों के प्रति अच्छे से पेश आएगा । . 2. जूरी सिस्टम : मुकदमो की सुनवाई के लिए जज सिस्टम हटा कर, क्षेत्र के नागरिको को मुकदमो की सुनवाई का अधिकार दिया जाए तथा न्यायधीश को प्रजा अधीन किया जाए । . 3. DDMRCM : इस क़ानून के अनुसार देश की खनिज सम्पदा पर देश के करोड़ो नागरिको का अधिकार होगा । खनन से जो रोयल्टी प्राप्त होगी उसे सीधे नागरिको के खाते में भेजा जाएगा । इस क़ानून के आने से खनन में व्याप्त भ्रष्टाचार ख़त्म होगा और गरीबी में कमी आएगी । . राईट टू रिकाल रसद अधिकारी : इन इलाको को दी जाने वाली सब्सिडी, अनुदान, रसद, राशन आदि रसद अधिकारी खा जाता है । ये क़ानून आने से इनका हिस्सा इन्हें मिलने लगेगा । . 5. राईट टू रिकाल सांसद . 6. राईट टू रिकाल विधायक . 7. राईट टू रिकाल चिकित्सा अधिकारी . इन कानूनों को गेजेट में छापने से नक्सल समस्या का समाधान 6 माह के भीतर हो जाएगा, और हज़ारो जवानो और लाखो नागरिको को इस सशस्त्र संघर्ष से मुक्ति मिलेगी । ===== अपने सांसद को SMS द्वारा आदेश भेजे कि इन कानूनों को गेजेट में छापा जाए : . I order you to print mentioned law drafts in gazett. tinyurl . com/ rtrpolice tinyurl . com/ jurysys tinyurl . com/ naagrikamdani tinyurl . com/ printtcp tinyurl . com/ rtrshiksha _______________ प्रजा अधीन राजा @ pk
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