by Rahul Chimanbhai Mehta Rrg at December 23, 2014 at 05:52PM
PK फिल्म की कहानी (got from email) . PK is a useless movie. Dont waste your time and money. Instead see a good movie like Interstellar (I saw Interstellar 4 times) . PK फिल्म की कहानी . पीके (आमिर खान ) एक एलियन है, जिसे धरती पर इसलिए भेजा जाता है ताकि वो उन जैसे दिखने वाले लोगों के बारे में पता लगा सके. लेकिन धरती पर कदम रखते ही पीके का लॉकेट जिसे वो रिमोट कंट्रोल कहता है, एक आदमी चुरा लेता है। रिमोट के बिना वो अपने ग्रह से संपर्क नहीं कर पाता और रिमोट की तलाश में घूमना शुरू कर देता है। . दूसरी तरफ, दिल्ली की रहने वाली जगत जननी उर्फ जग्गू (अनुष्का शर्मा) जो विदेश में रहकर पढ़ाई कर रही होती है उसे सरफराज (सुशांत सिंह राजपूत) से प्यार हो जाता है, लेकिन उसके घरवाले तपस्वी महाराज (सौरभ शुक्ला) के कहने पर इस रिश्ते को नामंजूर कर देते हैं। . तपस्वी का कहना होता है कि सरफराज जग्गू को धोखा देगा। ऐसा ही होता है और बाद में जग्गू दिल्ली लौट आती है। दिल्ली लौटकर जग्गू एक न्यूज चैनल ज्वाइन कर लेती है। इधर रिमोट की तलाश में पीके भी दिल्ली आ जाता है। जग्गू की जब पहली बार पीके से मुलाकात होती है तो उसे एक स्टोरी नजर आती है। ऐसे में वो पीके का पीछा करती है और उससे पुलिस स्टेशन में मुलाकात करती है। पीके जब अपने बारे में ये बताता है कि वो दूसरे ग्रह से आया है तो उसे यकीन नहीं होता, लेकिन बाद में पीके इस बात का यकीन दिलाने में कामयाब हो जाता है। अब अनुष्का पीके की रिमोट ढूंढने में मदद करती है। . धरती पर आकर पीके इस बात को महसूस करता है कि यहां के लोगों की सिर्फ बोली ही अलग नहीं है, बल्कि भगवान भी अलग-अलग है। यहां तक की पूजी करने का ढंग भी एक-दूसरे से जुदा है। जैसे, लोग मंदिरों में नंगे पैर जाते हैं वहीं गिरजाघरों में जूते पहनकर चले जाते हैं। पीके को इस बात का भी कनफ्यूजन रहता है कि हिंदू धर्म की विधवा सफेद साड़ी पहनती है। वहीं ईसाई धर्म की लड़की सफेद गाउन में शादी करती है। ईसाई धर्म को काई व्यक्ति मरता है तो वो ब्लैक कपड़े पहनते हैं, जबकि मुस्लिम लड़कियां आमतौर पर ब्लैक बुरका पहनती है। . पीके को जब ये मालूम होता है कि धरती पर रहने वाले लोग भगवान के नाम पर तपस्वी जैसे लोगों से रॉन्ग नंबर लगा रहे हैं। यानी तपस्वी अपने स्वार्थ के लिए लोगों का इस्तेमाल कर रहा है। इतना ही नहीं, कई बार लोग बिना पूरी बात जाने परिणाम तय कर लेते हैं। ऐसे में रॉन्ग नंबर को राइट नंबर बताने के लिए वो अपने अलग ही तर्क देता है। साथ ही, अपनी बातों को उदाहरण के साथ बताता है। .
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