by Pawan Kumar at November 02, 2014 at 01:29AM

आठवीं बोर्ड करना ही पर्याप्त नहीं है, सात्य प्रणाली तथा जिला शिक्षा अधिकारी को प्रजा अधीन किये बिना शैक्षिक सुधार दूर कि कौड़ी है। _________________________ राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने 8 वीं को फिर से बोर्ड करने का फैसला किया है । ज्ञातव्य है कि 2009 में RTE का बहाना लेकर मनमोहन सरकार ने आठवीं बोर्ड को निरस्त कर दिया था । यह FDI EFFECT है कि हमारे सरकारी स्कूल बद से बदतरीन होते जा रहे है और सरकारे सुधार के नाम पर खानापूर्ति कर रही है । . विज्ञान और गणित की शिक्षा से ही तकनीक आती है, तथा सरकारी स्कूलों का अच्छा स्तर धर्मांतरण के अवसरों को कमजोर कर देता है, इसीलिए बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ एवं मिशनरीज प्रलोभन/दबाव का इस्तेमाल करके ऐसे क़ानून पास करवाती है जिस से विज्ञान और गणित का आधारभूत ढांचा चरमरा जाए । . सरकारी स्कूलों की बदहाली के चलते पिछले दशक भर में लगभग आधा मध्यवर्ग बलात रूप से निजी स्कूलों की शरण में धकेला जा चुका है, जबकि सरकारी स्कूल निम्न और मध्य वर्ग के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे है । निम्न वर्ग के पास शिक्षा के लिए सरकारी स्कूलों के अलावा कोई विकल्प नही है, क्योंकि निजी स्कूल उनकी पहुँच से बाहर है । वैसे मध्य वर्ग भी कम घाटे में नही रहा है । उनके पास विकल्प के तौर पर सिर्फ निजी स्कूल बचे है जो कि उनकी गर्दन मरोड़ कर नर्सरी और एल केजी के भी उतने पैसे वसूल रहे है, जितने में सरकारी स्कूलों में उच्च माध्यमिक तक की शिक्षा पूर्ण हो जाती है । . कई शहरो में अभिभावक संघर्ष सिमितियाँ स्कुल संघो से फ़ीस इत्यादि कम करवाने के लिए अंतहीन संघर्ष में मुब्तिला है लेकिन सरकारी स्कूलो की दुर्दशा सुधारने को लेकर उदासीन बनी हुयी है, जो कि समस्या की जड़ है । करोड़ो अभिभावको को यह अहसास ही नहीं है कि, उनके खून पसीने की कमाई शिक्षा के नाम पर उनसे इसीलिए लूटी जा रही है, क्योंकि सभी सरकारे MNCs और मिशनरीज़ के दबाव में सरकारी स्कूलों को तबाह करने पर तुली हुयी है । . तो आठवीं बोर्ड किये जाने के फैसले के बाद कितने अभिभावक अपने बच्चो को निजी स्कूलों से निकालकर सरकारी स्कूलों को भर्ती करवाने का विचार कर रहे है ? जवाब है, शून्य । क्योंकि अभिभावक जानते है, कि कुछ भी बदलने वाला नही है । === समाधान : प्रजा अधीन राजा समूह ने शिक्षा सुधार के लिए क़ानून ड्राफ्ट्स प्रस्तावित किये है, जिन्हें गेजेट में छापने से हम सरकारी स्कूलों का स्तर निजी स्कूलों से बेहतर बना सकते है । 1. प्रजा अधीन जिला शिक्षा अधिकारी : जिला स्तर पर नीतियों के निष्पादन एवं स्कूलों के कुशल प्रबंधन के लिए जिला शिक्षा अधिकारी जिम्मेदार होता है, अत: हम मांग कर रहे है कि जिला शिक्षा अधिकारी क्षेत्र के अभिभावकों द्वारा चुना जाए तथा क्षेत्र के अभिभावकों के पास उसे मतदान द्वारा नौकरी से निकालने की शक्ति हो । ये क़ानून पास होने से शिक्षा माफिया, नेता और अधिकारियों का गठजोड़ टूट जाएगा, और शिक्षा अधिकारी ईमानदारी से प्रजा के हित में कार्य करेगा । निकम्में और भ्रष्ट अधिकारी को अभिभावक मतदान द्वारा किसी भी समय नौकरी से निकाल सकेंगे, जिस से जिला शिक्षा अधिकारी जनता के प्रति जवाबदेह बना रहेगा । ( ड्राफ्ट का लिंक नीचे दिया गया है) . 2. प्रजा अधीन शिक्षा मंत्री : शैक्षिक नीतियाँ विधान सभा एवं लोक सभा में बनायी जाती है, अत: हम मांग कर रहे है कि मानव संसाधन मंत्री तथा राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को नौकरी से निकालने का अधिकार सीधे जनता के पास हो । . 3. गणित एवं विज्ञान की शिक्षा में गुणवत्ता बढाने के लिए गणित एवं विज्ञान में सात्य प्रणाली : गणित एवं विज्ञान का आधार उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक कक्षाओं में तैयार होता है । इस आधार को मज़बूत करने के लिए हमें उन प्रतिभाशाली शिक्षको की आवश्यकता है, जिनमे शिक्षक तत्व* हो । गणित और विज्ञान में पिछड़ने के कारण हम तकनीक में पिछड़ गए है, तकनीक के अभाव में भारत स्वदेशी आधुनिक हथियारों का उत्पादन नहीं कर पा रहा है, और हमारी सेना विदेशी हथियारों पर निर्भर हो गयी है । सात्य प्रणाली आने से जहाँ एक और अभिभावकों द्वारा शिक्षा पर किये जाने वाले खर्चे में भारी कमी आएगी वहीँ दूसरी और शिक्षा की गुणवत्ता उत्कृष्ट स्तर की हो जायेगी । (सात्य प्रणाली की प्रक्रिया अंत में दी गयी है ) . 4. शिक्षको के स्थानान्तरण तथा निलंबन के लिए नागरिको की ज्यूरी प्रक्रिया : शिक्षको को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए हम मांग कर रहे है कि स्कूल स्टाफ के विवादों तथा स्थानान्तरण/निलंबन के फैसले क्षेत्र के अभिभावको की ज्यूरी द्वारा हो । इस क़ानून से निकम्मे और लापरवाह शिक्षको को ज्यूरी द्वारा हटाया जा सकेगा तथा सजग शिक्षको को पदोन्नति के निष्पक्ष अवसर मिलेंगे । . 5. सरकारी स्कूलों में अंगेजी माध्यम का प्रावधान : अधिकतर अभिभावक अपने बच्चो को निजी स्कूलों में पढ़ाने के लिए इसीलिए मजबूर है, क्योंकि सरकारी स्कूल अंग्रेजी के अध्यापन में पिछड़े हुए है । हम मांग कर रहे है कि सरकारी स्कूलों में पाठ्य पुस्तको को द्विभाषी बनाया जाए। इस प्रकार पुस्तक का एक पृष्ठ स्थानीय भाषा (सम पृष्ठ संख्या) में होगा, तथा अगले पृष्ठ (विषम पृष्ठ संख्या) पर उसका अंग्रेजी में अनुवाद होगा । छात्र को सुविधा होगी कि वह इच्छित माध्यम में परीक्षा दे सके । . 6. छात्रों को क़ानून की शिक्षा देना : देश को क़ानून चलाते है अत: प्रत्येक नागरिक को क़ानून व्यवस्था की बुनियादी समझ होना आवश्यक है, लेकिन हम छात्रों को कानूनों की जानकारी नही दे रहे है। हम मांग कर रहे है कि, क़ानून की किताबो का सरलीकरण किया जाए तथा कक्षा 5 से क़ानून की शिक्षा सभी छात्रों के लिए अनिवार्य की जाए । === *शिक्षक तत्व- कुछ व्यक्तियों में व्याख्या करने की अच्छी क्षमता होती है तथा वे किसी भी बिन्दू या मसले को अपेक्षाकृत सुबोध और सुगम तरीके से समझा पाते है , तथा उन्हें ऐसा करने में संतोष का अनुभव होता है । विज्ञान और गणित जैसे जटिल विषयों में यदि हम ऐसे शिक्षको को आकर्षित कर पाए तो हमारे छात्रों की प्रतिभा को तराशा जा सकेगा । दूसरा लाभ प्रतिस्पर्धा का मिलेगा और शिक्षण विधियों में नए आयामों की खोज के अवसर मिलेंगे । सात्य प्रणाली का उपयोग अंग्रेजी तथा हिंदी ( साहित्य) में भी किया जा सकेगा । _______ गणित विज्ञान के लिए सात्य प्रणाली की प्रक्रिया : 1. जो भी गणित का शिक्षक बनना चाहता है वो DEO के पास 100 रूपये देकर अपना नाम पंजीकृत करवा सकेगा । 2. शिक्षक स्वतंत्र रूप से छात्र जुटाएगा तथा उन्हें पढ़ायेगा । 3. छात्र या अभिभावक इस के लिए शिक्षक को कोई भुगतान नही करेंगे । 4. परीक्षाए DEO आयोजित करवाएगा तथा परिणामो के आधार पर ग्रेड देगा । 5. परीक्षाए मासिक तथा वार्षिक होगी । ( मासिक- बहुविकल्पीय ) 6. औसत से अधिक अंक लाने वाले छात्रों की वरीयता सूची बनेगी । 7. वरीय ग्रेड के आधार पर शिक्षक को पुरूस्कार दिया जाएगा । जो पुरस्कार शिक्षक को मिलेगा वही छात्र को भी मिलेगा । 8. शिक्षक को अन्य कोई वेतन भत्ते आदि देय नही होगा । 9. यदि छात्र चाहे तो सत्र के मध्य में भी अपने शिक्षक के बदल सकेगा । 10. पुरस्कार की राशि संपत्ति कर से वितरित की जायेगी ( संपत्ति कर का 2% ) उदाहरन के लिए क X एक अध्यापक 50 छात्रों को पढाता है जिसमे से 10 छात्र ग्रेड A तथा 5 छात्र ग्रेड A+ हासिल करते है, तो 5000 × 5 = 25000 , 1000 × 10 = 10000, । कुल 35000 रूपये शिक्षक प्राप्त करेगा ( उदाहरण वार्षिक आधार पर दिया गया है ) . इन सभी कानूनों के ड्राफ्ट्स दिए गए लिंक पर देखे : rahulmehta . com/301 . h. htm (chapter - 30, 23) नागरिको से निवेदन है कि अपने क्षेत्र के विधायक तथा सांसद को SMS द्वारा ऑर्डर भेजे, कि सात्य प्रणाली और ज्यूरी ट्रायल का ड्राफ्ट गेजेट में छापा जाए । प्रजा अधीन राजा @ pk

by Pawan Kumar



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via Bhavik Barai

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