by Parveen Chaudhary at January 28, 2015 at 03:35AM

कल जब से गीता प्रेस के बंद होने की न्यूज़ आई है तब से मन में अजीब सी खलबली है । हम जब मंदिरों में, कई संतो और मुनियों के पास करोडो और अरबो रूपये चढ़ावा करते है, जब अलग अलग संप्रदाय अपने संप्रदाय के प्रचार के लिए कोई भी kasar नहीं रखते तब एक संसथान जो की बिना किसी मुनाफे के काफी वर्षो से हिन्दू साहित्य एवं धर्म ग्रन्थ छाप रहा है उसका बंद होना हमारी आँखे खोल देता है ।क्या हमारे विभिन्न संघटन एवं मंदिर के ट्रस्ट थोड़ी सी आर्थिक सहायता गीता प्रेस को नहीं दे सकते? क्या गीता प्रेस द्वारा किया गया धर्म का प्रचार किसी संत महात्मा,किसी मंदिर ट्रस्ट से कम है? बहुत से प्रश्न खड़े किये जा सकते है पर मुझे उम्मीद है की वो नौबत नहीं आएगी क्योकि इस सन्देश के फैलते ही हिन्दू समाज स्वयं आर्थिक मदद कर के गीता प्रेस को फिर शुरू करवा देगा । आप हिन्दू एकता का सपना देखते हो तो ज्यादा से ज्यादा लोगो को ये msg भेजे ।

by Parveen Chaudhary



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via Bhavik Barai

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