by Dipak M Rajurkar at January 04, 2015 at 08:07PM
व्यवस्था परिवर्तन के लिए Recalliest भाईयो के लिए कुछ निवेदन(व्यक्तिगत रूपसे) ============ आज हम RTR Group इधर उधर की गोल गोल बाते न करते हुए सीधे काम की बात करते है। किसी समस्या पर, मुद्दो पर सिर्फ हल्ला नहीं बल्कि उसका निदान भी रखते। यही खासियत हमे दूसरे राजनेतीक गटों से अलग करती है। पर कुछ दिनो से मुझे एक बात समज आ रही है, के यह सब हम कर रहे है। वह देश मे एक सुव्यवस्था, सुराज्य के किए कर रहे है आए हमारा देश स्वयम निर्भर हो, देश मे कोई भी गरीब न हो, कोई खुद को असुरक्षित न समजे, आदि आदि। पर एक बात पिछले कुछ दिनो से मुझे जो खटक रही है, वह ये के हम जो कुछ भी बोल रहे है, जो कुछ भी ड्राफ्ट का प्रचार कर रहे है। वह सिर्फ पढे लिखे लोगो को समज आता है, कायदा कानून की बाते जरा कम पढे लिखे लोगो को नहीं समज आता है। पर सच यह भी है देश के बारे सोचने वाले लोग तो, यह कम पढे लिखे लोग ही है। आज हमारी बाते पढे लिखे समजती है पर मुझे नहीं लगता के यह लोग कभी हमारे साथ आएंगे। कल मनलों TCP के लिए कुछ जमीनी स्तर पर कुछ करने का वक्त आए तो यह कम पढे लिखे लोग ही हमारे साथ होंगे, न की जादा पढे लिखे गवार, (जो अपनी जिंदगी मे सिर्फ पैसा कमाकर जी रहे है, या फिर उनके उलटे सीधे तर्क रखकर हमे परेशान करेंगे (AAP))। जैसे के RTR Group मे हम जादा तर लोग श्री राजीव जी दीक्षित को मानने वाले है, तो उनके अनुसार “हमे देश के लोगो के लिए कुछ करना चाहिए, उनके दूख दर्द कम करने के लिए, उनके मद्दत के लिए आगे आना चाहिए”। आज देश मे किसी भी घर मे जाओ 4 मे से 2 बिमार ही दिखेंगे, किसी न किसी रोग से पीड़ित है। अगर हम उनकी मद्दत करे जैसे राजीव जी करते थे। तो वह व्यक्ति आज नहीं तो कल हमारे कहने पर RTR और TCP के लिए कुछ न कुछ तो जरूर करेगा। हमारे देश के लोगो मे यह बहोत बुरी आदत है के, सामने वाला क्या कह रहा, यह उनके लिए कोई मायने नहीं रखता, भले ही वह लाख अच्छी बात कहे या फिर बुरी, पर कोण कह रहा है यह महत्व पूर्ण होता है। (MODI support FDI so people too!) आज हम किसी को बोलते है के भाई TCP को सपोर्ट के लिए कुछ SMS करदों तो वह हमारे कहने पर उस वक्त sms तो कर देता है, पर वह इंसान दूसरे को करने के लिए नहीं कहता। क्यू ? उसके लिए यह काम इतना महत्व पूर्ण नहीं है, वह उस वक्त हमारी खुशी के लिए sms कर देता है, पर दूसरे को नहीं कहता। अगर यही बात राजीव जी कहते तो उनके सारे चाहने वाले बिना सोचे समजे sms कर देंगे और दूसरों को भी करेने को कहेंगे। कारण वही है “क्या कहता है यह उतना महत्व पूर्ण नहीं जितना कहने वाला”। आज RTR Group का उतना दर्जा नहीं के हमारे एक कहने पर बाकी लोग दूसरे को कहे। तो मेरा यह निवेदन है (सिर्फ उनके लिए जो यह कर सकते है) के RTR Group का कद बढ़ाने हेतु (सिर्फ देश मे RTR, TCP लाने के लिए) लोगो से जुड़े, उनके दूख दर्द अपने समज कर उनको निवारण की कोशीश करे। जादा से जादा जमीनी कार्य करे। जिससे RTR Group का दर्जा बढ़े, राजीव जी को लोग समजे, एक बार लोग राजीव जी को समज गए तो फिर हमे उनको किसी आज के नेता के बारे मे बताने की जरूरत ही नहीं। जैसे हम Recalliest राजीव जी को सुनकर तयार हुए, सही गलत की पहचान कर सकते है वैसे लोगो को भी बनाना पड़ेगा। न के किसी को मिलते ही RTR के कसीदे पढ़ो। पहले कुछ दो, फिर लेते रहो, (उनका RTR को समर्थन) आखिर मे एक बात कहूँगा जो मेने श्रीमद भगवत गीता से सीखि कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि ॥ हमे सिर्फ हमारा काम करना है, फल चाहे जो मिले। वंदे मातरम
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